How to Register Company with Full Case Study in Hindi

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अक्सर आपने लोगों को कहते सुना होगा यार पैसा तो बिज़नस में है हर बहस करना सबके बस की बात नहीं है लेकिन फिर भी लोग रिस्क लेते हैं आगे बढ़ते हैं और अपना खुद का सोचा हुआ बिजनेस शुरू करते हैं। इसके लिए छोटी ही सही कंपनी की शुरुआत करना सबसे बेस्ट ऑप्शन होता है क्योंकि आगे चलकर आप जब अपने बिजनेस को बढ़ाने की सोचेंगे तो अपनी खुद की कंपनी का होना बहुत जरूरी है. आज इस article में आपको पूरी केस स्टडी के साथ ही बतायेंगे कि How to Register Company? और कैसे शुरू करें अपनी खुद की कंपनी? तो चलिए जानते हैं।

अगर आपका कोई जानने वाला रिश्तेदार दोस्त या कोई परिचित व्यक्ति पहले से ही कोई बिजनेस कर रहा है तो सबसे बेहतर होगा कि आप उसके एक्सपीरियंस से सीखें। आप चाहे तो किसी consultancy या business firm की हेल्प भी ले सकते हैं। किसी भी बिजनेस को शुरू करने से पहले कुछ जरूरी फॉर्मेलिटीज पूरी करनी होती हैं जिनमें फीस भी जमा करनी होती है।

World Trade Organization यानी WTO ने भारत में बिजनेस शुरू करने के लिए कुछ जरूरी स्टेप्स के बारे में बताया था और आज इन्हीं सारे जरूरी स्टेप्स को आसान शब्दों में पूरी केस स्टडी के साथ आपको बताएगा कि आप कैसे अपनी खुद की कंपनी रजिस्टर कर सकते हैं तो ध्यान से सुनिए इन सभी बातों को।

1. Director Identification Number(DIN):

पहला स्टेप ये डीआई एंड डिन बनवाना। कंपनी शुरू करने के लिए सबसे पहले आपको Director Identification Number यानी की DIN के लिए आवेदन करना होगा। DIN मिलने में करीब एक से दो दिन का टाइम लग सकता है जिसके लिए थोड़ी फीस भी लगती है। DIN के लिए आप Ministry of Corporate Affairs की वेबसाइट www.mca.gov.in पर जा सकते हैं। वहां पर आपको इसकी पूरी जानकारी और फॉर्म सबमिट करने का प्रोसेस दिख जाएगा।

अगर कोई भी कन्फ्यूजन है तो गूगल पर सर्च कीजिए what is DIN? आपको mca.gov.in का एक लिंक मिलेगा और उसे खोलते ही आपकी सारी सवालों के जवाब और डॉक्युमेंट्स की रिक्वायरमेंट आपको दिख जाएगी तो अगर आप चीजों को पढ़ जाएंगे तो अपने आप चीजें आसान होती जाएगी। बस इतना समझ लीजिए कि कोई भी कंपनी चलाने के लिए एक बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की जरूरत पड़ती है और ये DIN उसी के लिए है।

2. Apply For Digital Signature:

DIN मिलने के बाद आपको आनलाइन अप्लाई करके digital signature का certificate लेना होता है जिसके लिए आपको 400 रुपये से लेकर 2700 रुपये तक खर्च करने पड़ सकते हैं। डिजिटल सिग्नेचर आपके हाथी के सिग्नेचर का डिजिटल वर्जन होता है जिसकी जरूरत आपको हर वक्त अपनी कंपनी चलाते हुए पड़ेगी।

3. Register The Name of The Company:

हमारा नाम हमारी पहचान बने इसके लिए आपको कंपनी का नाम डिसाइड करना होता है जो किसी और दूसरी कंपनी से मिलना नहीं चाहिए। इसलिए आपको नाम के तीन चार ऑप्शन सोचने पड़ेंगे। एक कंपनी को रजिस्टर करवाने के पूरे प्रोसेस में आपको Ministry of Corporate Affairs की कई बार जरूरत पड़ेगी। इसके लिए आपको रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज मिनिस्ट्री ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स पर अप्लाई करना होगा जिसमें दो दिन का समय लग सकता है।

कंपनी का नाम रजिस्टर्ड करवाने में एक हजार रुपये की फीस आपको देनी पड़ती है। कंपनी का नाम रजिस्टर हो जाने के बाद आपको कंपनी के लिए रबर स्टैम्प भी बनवाना पड़ेगा जिसका खर्चा बहुत ज्यादा हुआ तो 500 रुपये आएगा। Stamp या seal बन जाने के बाद आपको stamp duty भरनी होती है जो ऑनलाइन किया जाता है। कंपनी को शुरू करने के लिए कुछ जरूरी फार्म और डॉक्युमेंट्स भी आनलाइन जमा करने होते हैं।

How to Register Company

इस पूरे प्रोसेस में 3 से 7 दिन का वक्त लगता है और साथ ही करीब 25 हजार रुपये तक का खर्च आता है जो कम या ज्यादा हो सकता है। इस बारे में अगर आपको कोई जानकारी नहीं है तो सबसे पहले एक CA को हायर करें जो आपको इस काम में गाइड करेगा और आपके behalf से सारा काम कर देगा।

होसके तो किसी CA से tie-up कर लीजिए जिसकी जरूरत आपको हर वक्त पड़ती ही रहेगी। इसके अलावा भी कंपनी के नाम पर आप कोई पेनकार्ड भी बनवाना होता है जो आपको पैसों के लेन देन में काम आएगा और कंपनी जब स्टैबलिश हो जाएगी तो आपको इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने में काम आएगा। पैन कार्ड बनवाने में करीब 7 दिन का समय लगता है और करीब सौ रुपये तक का खर्च आता है। पैन का लेने के बाद इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से टैक्स अकाउंट नंबर लेना होता है ताकि समय पर टैक्स जमा किया जा सके। इसमें ज्यादा खर्च नहीं होता है।

Google पर TAN registration search करते ही आपको NSDL की वेबसाइट लिंक मिल जाएगी जहां टैक्स से जुड़ी जरूरी जानकारी और रजिस्ट्रेशन प्रोसेस आपको दिख जाएगा। अगर आप मिनिस्ट्री ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स के MCA service tax के अंदर इनक्वायरी फीस सेक्शन में जाएंगे तो आपको एक फीस कैलकुलेटर भी दिखाई देगा जहां पर आप check कर सकते हैं कि कंपनी रजिस्ट्रेशन करवाने के लिए आपको टोटल कितनी फीस भरनी पड़ेगी। कंपनी के लिए

एक रजिस्टर्ड ऑफिस एड्रेस भी होना चाहिए. जब आप Ministry of Corporate Affairs के रजिस्ट्रार ऑफ कंपनी में रजिस्ट्रेशन की अप्लीकेशन डालेंगे। तब आप कोई रजिस्टर्ड ऑफिस एड्रेस भी देना होता है। अब office address इसीलिए देना जरूरी है ताकि आप बता पाएं कि आपकी कंपनी कहां से ऑपरेट कर रही है। लोग आपसे कहां कम्युनिकेट करेंगे। साथ ही कोई डॉक्यूमेंट कोरियर या लैटर डिस्पैच करने के लिए एक लीगल एड्रेस भी तो होना ही चाहिए।

4. Registration in Provident Fund:

अगर आपकी कंपनी में 20 या उससे ज्यादा कर्मचारी हैं तो गवर्मेंट रूल के हिसाब से आपको प्रोविडेंट फंड में रजिस्ट्रेशन करवाना मेंडेटरी है। EPF यानी employee provident fun organization में रजिस्ट्रेशन के लिए 12 दिन का टाइम लग जाता है। How to register company for pf search करने पर epfindia.gov.in की वेबसाइट आपको दिखाई देगी। जहां पर आपको जरूरी जानकारियां मिल जाएगी। वैसे इस काम में आपका CA आपकी हेल्प कर सकता है। इसलिए कंपनी रजिस्ट्रेशन के पहले ही दिन से आपको लीगल एडवाइजर या लॉयर को रख सकते हैं।

5. Company Medical Insurance Registration of ESIC:

PF के बाद आपको अपनी कंपनी ESIC के लिए रजिस्ट्रेशन कराना होगा जिसमें 9 से 10 दिन का समय लगेगा। इम्प्लॉइज स्टेट इंश्योरेंस कॉरपोरेशन में रजिस्ट्रेशन के बाद आपकी कंपनी के ऊपर इम्प्लॉई की बीमारी का ज्यादा कोई खर्चा नहीं आता है क्योंकि मिनिमम फीस देने के बाद ईएसआईसीESIC में रजिस्टर्ड कंपनी का employee और उसके परिवार को मेडिकल इंश्योरेंस की सुविधा मिलती है। India में कंपनी रजिस्टर करवाते वक्त कई तरह के ऑप्शंस होते हैं जिनमें आप चूज कर सकते हैं कि आपकी कंपनी का फॉर्मेट क्या होगा जेसे private limited, Limited Liability Company, Sole Proprietorship, One Person Company, Partnership Firm.

A. Sole Proprietorship:

अब आगे बात करते हैं सोल प्रोप्राइटर शिप के इस तरह की कंपनी में एक व्यक्ति ही कंपनी का मालिक होता है और इंडिया में इस तरह की कंपनी रजिस्टर करवाना सबसे आसान काम है। इस तरह की कंपनी रजिस्टर करने के लिए आपको आधार कार्ड पैन कार्ड बैंक अकाउंट और रजिस्टर्ड ऑफिस या रेंटल अग्रीमेंट की जरूरत पड़ेगी। इस सारी डॉक्युमेंट तैयार होने के बाद आप किसी CA से रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट का काम पूरा करवा सकते हैं.

फिर आप अपना काम शुरू कर सकते हैं इसमें कोई government registration की जरूरत नहीं है। ज्यादा कोई पेपर वर्क नहीं करवाना पड़ता है। कंपनी का सारा प्रॉफिट आपके अकेले का होता है। सिर्फ इनकम टैक्स देना पड़ता है। कोई डबल टैक्स नहीं चुकाना पड़ता

B. One Person Company:

2013 के पहले तक India में एक कंपनी बनाने के लिए कम से कम दो डायरेक्टर्स की जरूरत पड़ती थी। लेकिन सेंट्रल कमेटी 2013 में एक व्यक्ति के साथ भी कंपनी शुरू करने का अधिकार दे दिया। प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के मुकाबले इसे मैनेज करना आसान है। लोन जल्दी मिल जाता है और डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट डारेक्टर आइडेंटिफिकेशन नंबर कंपनी के नाम के अप्रूवल के साथ इसे शुरू किया जा सकता है। इसके लिए memorandum of association यानी कि MOA article of association यानी की AOA proof proof of registered office और ministry of corporate affairs के सारे फॉर्म्स फाइल करके आप अपना ही काम कर सकते हैं। इसमें भी CA और lawyer की आपको जरूरत पड़ेगी.

C. Partnership Firm

अगर आपने डिसाइड किया है कि आप अपने बेसिस पे पार्टनर्स रखेंगे तो इस लिस्ट में है क्या पार्टनरशिप फर्म बनाएं। इसके लिए आपको अपने पार्टनर्स के साथ मिलकर के पार्टनरशिप डीड बनवानी पड़ेगी जिसमें सारे नियम कायदे रहेंगे कि कंपनी कैसे चलेगी और पार्टनर्स अपने बीच प्रॉफिट शेयरिंग कैसे करेंगे पार्टनरशिप फर्म खोलना थोड़ा आसान होता है जिसमें रिस्क सभी पार्टस में शेयर हो जाता है। Established होने के बाद इस तरह की कंपनी को windup या बंद करना भी आसान होता है। कई पार्टनर्स होने से जिम्मेदारियां भी आपस में बंट जाती हैं लेकिन कंपनी सही से चलती रहे इसके लिए सभी पार्टनर्स की आपसी सहमति जरूरी होती है।