Blogging Tips For Content Writing – Tips For SEO

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Bloggers और SEO दोनों के लिए राइटिंग स्किल एक है जो कॉमन है, इम्पॉर्टेंट है और फिर भी सबसे ज्यादा इग्नोर किया जाता है। Blogging Tips ब्लॉगर को help करेगी आछे content लिख ने में और अपनी राइटिंग पर फोकस करने में। उसको हमेशा सही करने की कोशिश करते हैं लेकिन SEO राइटिंग पर बहुत कम फोकस करते हैं जबकि इससे उनके कैरियर को नुकसान होता है।

आज के article में हम देखेंगे कि आप SEO guidelines को ध्यान में रखते हुए अच्छा कैसे लिख सकते हैं। चाहे आप on page SEO पर फोकस कर रहे हैं। Technical SEO पर या फिर सिर्फ link building पर ही क्यों फोकस करते हों। आपको राइटिंग आनी चाहिए अच्छी राइटिंग आनी जरूरी है। अगर आप अच्छा लिखना जानेंगे तभी अच्छे कंटेंट को पहचान पाएंगे।

A. How to Write SEO Friendly Article:

पहले हम SEO के लिए राइटिंग प्रैक्टिस पर बात कर रहे हैं. एक सबसे इम्पोर्टेंट पॉइंट ये है कि आप आज के article में जो भी जानेंगे इस article में उसका बेनिफिट आपको कितना मिलेगा इस बात पर डिपेंड करता है कि आप प्रैक्टिस कितना करते हैं। कुछ लोग नैचुरली अच्छे राइटर्स होते हैं जैसे एक poet, स्टोरी राइटर्स, novelist ये सब लोग अपनी बात को बेहद अच्छे तरीके से सही वर्ड्स में लिख सकते हैं.

ये नैचरली टैलेंटेड हैं बाकि हम जैसे जितने भी बोलने वाले लोग हैं वो अगर अच्छा लिखना चाहते हैं तो उसके लिए उन्हें मेहनत करनी पड़ती है प्रैक्टिस करना होता है। आजके tips के जरिए आपको ये पता लगेगा कि आपको किस direction में कितनी मेहनत करनी है और बाकी सक्सेस का परसेंटेज आपको करता है। एक और खास बात है कि अगर अभी इसी वक्त आप और on page SEO in Hindi या advance SEO in Hindi सर्च करेंगे तो YouTube पर आपको कुछ मासूम लोगों के video मिलेंगे जो ऑन लाइन या technical SEO के नाम पर कंटेंट राइटिंग टिप्स दे रहे हैं।

एक मिनट के लिए सोचिए कि एक डब्बा है जिसके अंदर ऑन पेज एसईओ रखा हुआ है ना। अगर आप उस डब्बे के ढक्कन को खोलने को ढक्कन को ये नहीं पता चलेगा कि कौन पेज उपयोग किया है या कहां है एकदम वही यहां हो रहा है। समझे न मेरा पॉइंट ये है कि ओन पेज इस योग और कंटेंट राइटिंग अलग अलग चीजें हैं। कंटेंट राइटिंग बेहद इम्पॉर्टेंट है लेकिन सिर्फ अच्छा लिखना और जैसी वो नहीं होता है सो अच्छा लिखने के points को हम दो parts में devide करते हैं। नंबर एक Basic Practices और नंबर दो Long Term Practices. सबसे पहले हम बेसिक टिप्स के बारे में बात कर रहे हैं।

B. Blogging Tips for Basic Practices:

Blogging Tips for Basic Practices

1. छोटे Sentences लिखये:

छोटे सेंटेंस लिखें। चाहे आप इंग्लिश में लिखें हिंदी में लिखें। किसी भी लैंग्वेज में चाहे आप ब्लॉग लिखें वेबसाइट के लिए कंटेंट लिखें या किसी और रीजन से अगर आप चाहते हैं कि सर्च इंजन्स उसे रैंक करें उसे समझ पाएं और नॉर्मल ऑडियंस को सजेस्ट करें तो छोटे और आसान सेंटेंस में अपनी बात लिखिए छोटे पैराग्राफ में लिखिए। छोटे और आसान सेंटेंस वाले आर्टिकल्स को रैंक करने के चांसेज अच्छे होते हैं।

इसके दो रीजन से बेसिकली नंबर एक सर्च इंजन्स खुद ह्यूमन लैंग्वेज को अच्छी तरीके से अभी नहीं समझ पाते हैं। अभी हाल ही में उपेन ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बेस्ड लैंग्वेज मॉडल GPT3 लॉन्च किया है जिसमें 175 बिलियन लैंगवेज parameters हैं और फिर भी वो सही से यूज करने लायक टैक्स नहीं लिख पाता है सो नॉर्मल सर्च इंजन्स के बहुत कॉम्प्लेक्स सेंटेंस को समझने के चांसेस बहुत कम होते हैं। अगर सर्च इंजन्स आपके आर्टिकल को सही से समझेंगे नहीं तो फिर सही कीवर्ड लिख कर सकते हैं। इसलिए छोटे सेंटेंस अच्छे होते हैं उन्हें यूज करें।

2. Audience Have Different Levels of Understanding:

आपकी ऑडियंस का अंडरस्टैंडिंग लेवल अलग अलग होता है। जो बात आपको कॉमन सेंस लगती है वो हो सकता है आपकी ऑडियंस या आपके रीडर्स के लिए टफ हो। सर्च इंजन्स हर तरह की ऑडियंस को कैटर करना चाहते हैं इसलिए जब आप सिम्पल लैंग्वेज में समझाते हैं तो आपके कंटेंट के ज्यादा लोगों तक पहुँचने के चांसेज बढ़ जाते हैं और ज्यादा लोग उसे इंट्रस्ट लेकर पड़ते हैं। किसी भी टॉपिक पर लिखना या बोलना आसान होता है लेकिन उसे आसान से आसान लैंग्वेज में समझाना मुश्किल होता है।

3. Competitors का content मत पढ़िए:

काफी लोग आपको suggest करेंगे की आपको अपने competitors का content जरूर पढ़ना चाहिए और फिर उसमें जितने कीवर्ड्स हैं उतने ज्यादा की वर्ड्स यूज करने चाहिए से ज्यादा की वर्ड्स यूज करने चाहिए। जितने H1, H2 हेडलाइन सबसे ज्यादा यूज करनी चाहिए but सब बेकार है। जब आप अपने कंप्यूटर के competitor को पढ़ते हैं तो इस बात के चांसेस हमेशा बढ़ जाते हैं कि आप उसी की स्टाइल में लिखेंगे।

इट्स नैचुरल पर आप अपने कंप्यूटर के जैसा ही लिखेंगे तो google आखिर एक ऐसी कॉपीज कंटेंट को क्यों करेगा जिसका ओरिजिनल के पास है। अपने competitor के content को एनालाइज करिए एक बार उनके कीवर्ड्स को किस website पर internal और external से लिंक कर रहे है but पढ़िए नहीं।

4. Headline Tags को सही से use कीजिये:

Headline Tags यानि की H1, H2, H3, H4 इन सबको ठीक से यूज करिए। यहां इस पॉइंट पर काफी लोगों को दो कन्फ्यूजन होते हैं। नंबर वन फैक्ट है H1, H2, H3 ये सब रैंकिंग factor नहीं होते हैं। ये रैंकिंग नहीं होते हैं। नंबर 2 फैक्ट है कि आपको फिरभी H1, H2, H3 पर फिर भी ध्यान देना चाहिए और इन्हें सही से यूज करना चाहिए। अब आप सोचेंगे कि आखिर जब ये रैंकिंग है ही नहीं तो इन पर ध्यान क्यों देना चाहिए।

लेकिन H1, H2, H3 ये सब HTML atributes और टेक्निकली इनके होने या न होने से पेज रैंक पर कोई फर्क नहीं पड़ता है लेकिन जब आप H1, H2, H3 को यूज करते हैं तो आप बेसिकली अपने कंटेंट को फॉरमैट कर रहे होते हैं। आप पेज की इम्पॉर्टेंट पार्ट को हेडिंग से शुरू करते हैं आपके कंटेंट को एक शेप मिलता है और रीडर्स को उसे पढ़ने में और समझने में आसानी मिलती है।

Headings से यूजर को एक ब्रेक लेने का ऑप्शन देते हैं। किसी एक हजार वॉट के आर्टिकल को एक बार में पढ़ना मूवी बोरिंग हो जाए लेकिन अगर उसमें दो हेडिंग हैं और उसमें यूजर एक हेडिंग को खतम करने के बाद दूसरी शुरू होने से पहले थोड़ा सा ब्रेक ले लेता है तो उसे रेस्ट मिलता है तो इस तरह की आपके कंटेंट को यूजर के लिए पढ़ने और समझने में आसान बनाती है उनके एक्सपीरियंस को बढ़ाती है जिसे गूगल प्रेफरेंस देता है और बेटर रीडिंग करता है.

टेक्निकली गूगल H1, H2, H3 को कोई इम्पॉर्टेंस नहीं देता है लेकिन H1, H2, H3 यूज करके जब आप अपने कंटेंट को अच्छे से करते हैं यूजर के लिए कंटेंट को पढ़ने और समझने में आसान बनाते हैं वो गूगल को अच्छा लगता है और आपका कंटेंट अच्छा rank करता है तो और बाकी heading tags को सिर्फ ऐसे ही बिना सोचे समझे मत यूज करिए अपने आर्टिकल को अपने कंटेंट को फॉर्मैट करने के लिए यूज गली.

5. Text को decorate करिए:

Bold, Italic, और Bullet points को इग्नोर मत करिए heading tags की तरह Bold और Italic की text के part user को खास attract करते हैं। उन्हें उन खास प्वाइंट्स को पढ़ने में याद रखने में हेल्प करते हैं जो इन्हें सही से यूज करीब एक नॉर्मल अप्रोच होती है कि कीवर्ड्स को बोल्ड कर दिया जाए जो सही अप्रोच है लेकिन काफी सारे लोग पेज में जितनी बार भी कीवर्ड रिपीट होता है उतनी ही बार बोल्ड कर देते हैं। जैसे गूगल को मोतियाबिंद हो चुका है।

एक अपने कंटेंट में बार बार कीबोर्ड को अन्ना नेचुरली इनऑर्गेनिक तरीके से ठोकना नहीं चाहिए और अगर ऐसा कर ही दिया है तो उसे बोल्ड करके गूगल को बुलाने की कोई जरूरत नहीं अपने punishment के लिए. Bullet points भी आपके कंटेंट को स्ट्रेंथ देती है। Bullet points के जरिए आप इम्पॉर्टेंट पैक्स को प्रेजेंट कर रहे हैं जिसे यूजर याद रख सकता है। इसी रीजन की वजह से बोल्ड इटैलिक और बुलेट पॉइंट्स का सही से यूज करने वाला कंटेंट अच्छा rank करता है।

6. Keyword का बेस्ट और सही यूज करिए:

Keyword density चीज मिथ है लेकिन कीवर्ड्स इंपॉर्टेंट फैक्टर होते हैं बहुत ज्यादा। प्रॉब्लम ये है कि अधिकतर लोग कीवर्ड्स को वहां नहीं यूज करते हैं जहां उसका सबसे ज्यादा असर होता है। आपके कंटेंट में 5 ऐसी लोकेशन हैं जहां कीवर्ड जरूर यूज किया जाना चाहिए।

  • Meta Title:
  • H1 Tag
  • Internal Link Anchor Text
  • Meta Description
  • External Link Anchor Text

इन पांचों प्लेसेस पर कीवर्ड नैचुरली यूज होना चाहिए। फोर्स नहीं होना चाहिए ठूंसा नहीं लगना चाहिए। keyword को हमेशा as it is रिपीट करने की जरूरत भी नहीं है। गूगल लैंग्वेज को बहुत अच्छी तरीके से नहीं समझा सकते हैं लेकिन वर्ड्स के कॉम्बिनेशन का मीनिंग निकाल सकता है synonyms समझ सकता है। तो अगर आपका कीवर्ड है ‘Kids Bed’ तो आप ‘Children’s Bed’ भी यूज कर सकते हैं ‘Bed for Kids’ यूज कर सकते हैं।

इससे कोई प्रॉब्लम नहीं होगी। अगर आप श्योर नहीं है कि जो synonyms या alternate word आप यूज कर रहे हैं उसे गूगल सही से समझ सकता है नहीं तो आप उस को गूगल पर नॉर्मली सर्च करके देखिए आपको सर्च रिजल्ट से और शॉपिंग से पता लग जाएगा कि आप जो वर्ड यूज कर रहे हैं उन्हें गूगल सही से समझाए या नहीं। सो यदि वो बेसिक रूल्स जो आपको फॉलो करनी ही चाहिए इसके अलावा कुछ और भी ज्यादा इम्पॉर्टेंट प्रैक्टिसेज हैं जिन्हें आपको फॉलो करना चाहिए।

C. Blogging Tips for Long Term Practices:

Blogging Tips for Long Term Practices

1. Daily Practice:

जैसा कि article के शुरू में मैंने कहा था writing takes प्रैक्टिस। आप एक दिन में या एक महीने में अच्छा लिखना नहीं शुरू कर देंगे। रोज और लगातार लिखने से आपकी स्पीड बढ़ती है। जो चार पॉइंट्स अभी मैंने ऊपर बताए हैं उनको आपको याद रखने की जरूरत नहीं पड़ती है वो खुद बहुत प्रैक्टिस से आपको आने लगते हैं। आप नैचुरली उसी तरह से लिखना शुरू कर देते हैं।

2. Reader की तरह सोचे:

ब्लॉग या वेबसाइट के लिए लिखते टाइम हमेशा रीडर्स के पर्सपेक्टिव से सोचिए। सर्च इंजन पर लोग नॉवेल पढ़ने के लिए नहीं आते हैं वो अधिकतर question लेकर आते हैं जिसका असर उन्हें चाहिए आपके कंटेंट को उस question को एक्सप्लेन करना है और उसके answer को best तरीके से समझाना है।

3. जरूरत से ज्यादा लंबा मत लिखिए:

एक निहायत ही घटिया चीज जो कंटेंट राइटिंग के बारे में फैलाई गई है वो ये है कि 1800 या 1900 और 3000 के words हे तो बढ़िया रैंक करेगा। कोई निबंध प्रतियोगिता नहीं हो रही है बेकार myth चलाए जारहे है। कॉपी की ऊपर कॉपी भरे जा रहे बाई नेचर हर कोई कम से कम पढ़ना चाहता है। अगर सबको पढ़ाई लिखाई इतनी अच्छी लगती होगी सब टॉप पर होते सारे scientist बन जाते।

लेकिन एक सिम्पल ह्यूमन नेचर है कि वो कम से कम मेहनत में ज्यादा से ज्यादा results चाहता है तो जितने कम वोट्स में आप अपनी बात को रख सकते हैं उतना ही अच्छा रैंक होगा उतना ही बेटर गूगल रैंक करेगा। ना तो कंटेंट को छोटा रखने के लिए लिखिए ना ही जबर्दस्ती बड़ा करने के लिए अपने कंटेंट को प्रेजेंट करिए सिर्फ जरूरत के वर्ड्स के साथ

4. Spelling और Grammar check करे:

Spelling और Grammer का ध्यान रखिए चाहे जो भी लैंग्वेज हो. Spelling और Grammer की मिस्टेक से नॉर्मल यूजर भी कन्फ्यूज हो सकते है और सर्च इंजन्स भी अगर सर्च इंजन्स आपकी बात को सही से समझेंगे नहीं तो आपको rank नहीं करेंगे। इस तरह की मिस्टेक्स आपकी इमेज को भी नुकसान पहुंचाती है. तो हनेशा proof read करे make sure की स्पेलिंग और ग्रामर की मिस्टेक न हो। इंग्लिश के लिए सिर्फ grammerly पर trust मत करिए. खुदसे एक बार आरामसे read करिए और check करिए की कोई Spelling और Grammer की mistake नाहो.

अगर आप इस points को ठीक से follow करते है long term के लिए तो आपकी writing better होती जाएगी पर आपको practice जारी रखनी होगी. लगातार लिखना होगा.

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